कभी कभार
एक लम्हा
छूट जाता है हमारे पीछे ही
दीवारों पर लिखा तो
मिटा सकते हैं हम
लेकिन
दीवारों के जिस्म में लिखा
कहॉ पोछ सकते हैं कभी !
Posted by: vijaykumardave | July 6, 2007
बिदाई पर
Posted in हिन्दी
कभी कभार
एक लम्हा
छूट जाता है हमारे पीछे ही
दीवारों पर लिखा तो
मिटा सकते हैं हम
लेकिन
दीवारों के जिस्म में लिखा
कहॉ पोछ सकते हैं कभी !
Posted in हिन्दी